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Sunday, July 21, 2019

मंदिरों में घंटे क्यो लगाये जाते हैं ?

मानते सब है किन्तु जानते कोई नही है | जी हाँ आप ने सही पढा | हम जब भी भगवान की पूजा करते है उससे पहले हम  घंटी जरूर बजाते है और यह पूजा करने की प्रथम प्रतिक्रिया भी है परन्तु आपको पता है कि मंदिरों में घंटे क्यो लगाये जाते है और हम पूजा करने से पहले क्यो बजाते है ?  इसके पीछे भी हमारी प्रचलित हिन्दू मान्यता है | आइये इसे जानने का प्रयास करते है |


हिन्दू मान्यता के अनुसार :-

मंदिरों में घंटा लगे होने के अनेक कारण है |

1. प्रथम तो मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित देवता भी जागृत हो जायें | घंटे की ध्वनि से अनिष्टों का निवारण होता है | पुराणो और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब प्रलयकाल के बाद सृष्टि हुई उस समय घंटे की धार्मिक के समान ही नाद ( आवाज ) हुआ था |

2. दूसरा घंटे की ध्वनि सुनकर लोग जान जाते हैं कि मंदिर में प्रतिष्ठित देवी या देवता की आरती आरम्भ हो चुकी है | अतः जो आरती में सम्मिलित होने के उत्सक है वे शीघ्रता से पहुंचे और जो नही पहुंच सकते , वे जहाँ पर है वही पर खड़े होकर ध्यान कर लें |

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धन्यबाद |

कलाई में पूजा पाठ के समय लोग मौली या कलावा क्यो बाँधते है ?

मानते सब है किंतु जानते कोई नही ? जी हां आप ने सही पढ़ा | हम हमेशा कलाई में पूजा पाठ के समय मौली या कलावा बाँधते है | परन्तु आपको पता है ऐसा क्यों करते है | इसके पीछे भी हमारी  हिन्दू मान्यता और विज्ञान के कुछ तथ्य है | आइये जानते है क्या है इसके पीछे ??


हिन्दू मान्यता से अनुसार :-

शास्त्रो को मत है कि हाथ मे मौली बाँधने से त्रिदेवों ( ब्रम्हा , विष्णु , महेश ) और तीनों देवियों ( लक्ष्मी , सरस्वती , और काली ) की कृपा प्राप्त होती है | माँ लक्ष्मी की कृपा से धन संपत्ति , माँ सरस्वती की कृपा से विद्या-बुद्धि और माँ काली की कृपा से शक्ति प्राप्त होती है | इसलिए कलाई में पूजा पाठ के समय लोग मौली या कलावा बाँधते है |


विज्ञान ( science )  के अनुसार :-

शरीर विज्ञान के अनुसार त्रिदोष ( वात , पित्त और  कफ ) का शरीर पर आक्रमण नही होता क्योंकि एक्यूप्रेशर चिकित्सा के अनुसार रक्त का संचार  नाड़ियों में मौली से घषर्ण करते हुए होता है | घषर्ण से रक्त्त के संचार में शीतलता नही आती जिस कारण त्रिदोष होने का भय नही रहता |

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धन्यवाद |

Thursday, July 4, 2019

लोग सूर्य को जल क्यों चढ़ाते हैं ?

मानते सब है लेकिन जानते कोई नही | जी हां आप ने सही पढा हम लोग सुबह नहाने के बाद पहले सूर्य को जल अर्पित करते है फिर उसके बाद हम कोई काम करते है | किन्तु आप जानते है हम ऐसा क्यू करते है इसके पीछे हमारी कुछ धार्मिक मान्यता है और कुछ विज्ञान के तृत्थ भी है आइये इन्हे जानने का प्रयत्न करते है |

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार :-

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य को जल दिए बिना अन्न ग्रहण करना पाप हैं | अलंकारिक भाषा में वेदों में कहा है संध्या के समय सूर्य को दिए गए अध्य्र के जलकण ब्रज बनकर असुरो का नाश करते है इसलिए हम लोग नहाने के बाद सूर्य को पहले जल चलाते है |


विज्ञान के अनुसार :-

विज्ञान की दृष्टि में मनुष्य शरीर के अंदर असुर --- टाइफाइड , निमोनिया ,  टी.बी , आदि को कहा गया है | इनको नष्ट करने की दिव्य शक्ति सूर्य की किरणों में होती हैं | एन्थ्रेक्स के वायरस जो कई सालों के शुष्किकरण से नही मिटते , वे सूर्य की किरणों से एक -- डेढ़ घन्टे में मर जाते हैं | हैजा , निमोनिया , चेचक आदि के कीटाणु पानी में उबालने पर भी नहीं मरते किन्तु सूर्य की प्रभात कालीन किरणे इन्हें शीघ्र ही नष्ट कर देती हैं | इसलिये विज्ञान भी सूर्य को जल चढ़ाने की कहता है जिससे यह सब विकार सही हो सके |


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धन्यवाद |

आँखे :- इंसान की दो आँखे क्यों होती है ?

आँखे इंसान के शरीर का वो महत्वपूर्ण अंग होता है जिससे इंसान प्रकृति के दिये हुए सुंदर सौंधर्य का दीदार करता है बिना आँखों से इंसान का जीवन...